पता : कन्या गुरुकुल महाविद्यालय,
60, राजपुर रोड, देहरादून
टेलीफोन : +91-135-2748334
ईमेल : info@kgmdoon.com

विद्यालय का परिचय

गुरूकुल उस वैदिक शिक्षणालय का नाम है जिसमें वे बालक व बालिकायें जिनका यथोचित वेदारम्भ संस्कार हो चुका है, शिक्षा और विद्या प्राप्त करें। गुरूकुल की पाठविधि के विषय में सभा ने निश्चय किया कि इसमें विद्यार्थियों को ब्रह्मचर्य-पूर्वक जीवन व्यतीत करना होगा, वेद, संस्कृत-साहित्य तथा आंग्लभाषा का साहित्य पढ़ना आवश्यक होगा और साथ-साथ सब आधुनिक विधाओं को पढ़ने का माध्यम मातृभाषा -"हिन्दी" होगी। मानसिक विकास के साथ शारीरिक तथा आत्मिक विकास को दृष्टि में रखते हुए यह भी निश्चय किया गया कि गुरूकुल में व्यायाम, सन्ध्योपासना आदि करना आवश्यक होगा और सभी को विद्या समाप्ति तक गुरूकुल में ही वास करना होगा।

उक्त निश्चय के अनुसार 4 मार्च 1902 ई0 को महात्मा मुन्शीराम जी ने, जिनका संयास लेने के पश्चात् स्वामी श्रद्धानन्द नाम पड़ा, गुरूकुल काँगड़ी की स्थापना की।

प्रधानाचार्य का संदेश

वास्तव में गुरुकुल शिक्षा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि विद्यार्थियों के चरित्र का निर्माण करने के लिए उनकी दिनचर्या पर विशेष ध्यान दिया जाता है। विद्यार्थियों का प्रत्येक क्षण सूचीबद्ध तरीके से निर्मित होता है, जिनका पालन करना उनके अधिष्ठाताओं तथा गुरुओं का कर्तव्य होता है। प्रात: ब्रह्ममुहूर्त में जागने से लेकर रात्रि सोने तक विद्यार्थी श्रृंखलाबद्ध तरीके से विद्याध्ययन करने, भोजन करने तथा खेल-कूद आदि समस्त क्रियाकलापों में व्यस्त रहता है। इस प्रकार की दिनचर्या का लाभ यह होता है कि बचपन से ही अनुशासन में रहकर विद्यार्थी की शिक्षा इतनी मजबूत हो जाती है कि वह चरित्रवान होकर अपना समस्त जीवन बिना किसी कठिनाई के व्यतीत करने में तत्पर रहता है।


नवीनतम समाचार

नवीन सत्र प्रारम्भ 2018-19

प्रवेश परीक्षा प्रत्येक माह के प्रत्येक शनिवार को कराई जायेगी, प्रवेश परीक्षा की तिथि मई 19, 26, व 2, 9, 16, 23, 30 जून 2018




कन्या गुरूकुल महाविद्यालय देहरादून

गुरूकुल की विशेषतायें

यह युग नारी कल्याण का युग है। वही राष्ट्र प्रगतिशील कहा जा सकता हैे,जिसकी नारी अति शिक्षित एवं सबल होती है।

किसी भी राष्ट्र की सच्चा जागृति तभी सम्भव है जब कि कन्यायें शिक्षित एवं सुसंस्कृत होकर आगे आने वाली पीढ़ियों को सर्वतोन्मुखी उन्नति के पथ पर उत्तरोत्तर अग्रसर कर सकें। एक स्वस्थ और सबल राष्ट्र का निर्माण वस्तुतः शक्ति स्वरूप नारियों के ही हाथों में है।

गुरूकुल की उपाधियायें

गुरूकुल कांगड़ी को यूनिवर्सिटी ग्रान्ट्स कमीशन के एक्ट-3 के अधीन विश्वविद्यालय के समान मान्यता भारत सरकार द्वारा प्राप्त हो गई है।

यहाॅ की विद्याधिकारी उपाधि परीक्षा सरकार की मैट्रिक परीक्षा के बराबर है। इस परीक्षा में उत्तीर्ण छात्रा को उत्तर प्रदेश में इण्टर श्रेणियों में प्रवेश मिल सकता है तथा पंजाब यूनिवर्सिटी की शास्त्री परीक्षा सीधे दे सकने का अधिकार प्राप्त है।

गुरूकुल की प्रगतियाँ

शिक्षा को सर्वतोन्तुखी तथा जीवनोपयोगी बनाने की दृष्टि से कन्या गुरूकुल में विभिन्न परिषदों का भी आयोजन किया गया है।

जिसमें धार्मिक साहित्यिक, राजनैतिक तथा सामाजिक विषयों पर वाद विवाद तथा विचार विमर्श को प्रधानता दी जाती है। प्रति सप्ताह सोमवार को क्रमशः साहित्य-परिषद, इतिहास-परिषद, संस्कृत-प्रतिषद और कला परिषद की भी व्यवस्था की जाती है।

+91-135-2748334

GAZETTE OF INDIA NOTIFICATION No.F.10-17/623 U2, Dated 19.06.62

In exercise of powers conferred by section 3 of the University Grants Commission Act 1956 the Central Government on the advice of the Commission hereby declares that, the Gurukul Kangri Vishwavidyalaya Haridwar, which is an institution for higher education, shall be deemed to be a University for the purpose of the said act,

विद्याधिकारी एवं विद्याविनोद परीक्षाओं की मान्यता

गुरूकुल कागड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार द्वारा संचालित विद्याधिकारी एवं विद्याविनोद परीक्षाओं की उत्तराखण्ड विद्यालय शिक्षा परिषद, रामनगर, नैनिताल द्वार परिषद के विनियम 2009, अध्याय 14 विनियम 2/43 -4 के अन्तर्गत विद्याधिकारी परीक्षा को (हाईस्कूल) के समकक्ष एवं परिषद के विनियम 2009, अध्याय-12 विनियम 13/43 -4 के अन्तग्रत विद्याविनोद परीक्षा को (इण्टरमीडिएट) के समकक्ष मान्यता प्राप्त है।

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