पता : कन्या गुरुकुल महाविद्यालय,
60, राजपुर रोड, देहरादून
टेलीफोन : +91-135-2748334
ईमेल : info@kgmdoon.com

विद्यालय का परिचय

आर्य-प्रतिनिधि-सभा पंजाब एक रजिस्टर्ड संस्था है। इसकी रजिस्ट्री ‘‘गवर्नमेंट आॅफ इण्डिया‘‘ के एक्ट 21, 1860 ई0 के अनुसार सन 1884 में हुई थी। 26 नवम्बर 1898 को आर्य प्रतिनिधि-सभा ने गुरूकुल खोलने का निश्चय किया और उसकी निम्नलिखित परिभाषा कीः-


गुरूकुल उस वैदिक शिक्षणालय का नाम है जिसमें वे बालक व बालिकायें जिनका यथोचित वेदारम्भ संस्कार हो चुका है, शिक्षा और विद्या प्राप्त करें।

गुरूकुल की पाठविधि के विषय में सभा ने निश्चय किया कि इसमें विद्यार्थियों को ब्रह्मचर्य-पूर्वक जीवन व्यतीत करना होगा, वेद, संस्कृत-साहित्य तथा आंग्लभाषा का साहित्य पढ़ना आवश्यक होगा और साथ-साथ सब आधुनिक विधाओं को पढ़ने का माध्यम मातृभाषा -‘हिन्दी‘ होगी। मानसिक विकास के साथ शारीरिक तथा आत्मिक विकास को दृष्टि में रखते हुए यह भी निश्चय किया गया कि गुरूकुल में व्यायाम, सन्ध्योपासना आदि करना आवश्यक होगा और सभी को विद्या समाप्ति तक गुरूकुल में ही वास करना होगा।

उक्त निश्चय के अनुसार 4 मार्च 1902 ई0 को महात्मा मुन्शीराम जी ने, जिनका संयास लेने के पश्चात् स्वामी श्रद्धानन्द नाम पड़ा, गुरूकुल काँगड़ी की स्थापना की।

आर्य-प्रतिनिधि-सभा कि प्रस्ताव में गुरूकुल की परिभाषा करते हुए बालक तथा बालिकाएँ-दोनों का उल्लेख था। सभा ने बालको के लिए गुरूकुल काँगड़ी (हरिद्वार) को स्थापित किया और उन्हीं नियमों के अनुसार बालिकाओं की शिक्षा के लिए 23 कार्तिक 1980 वि0 तदनुसार 8 नवम्बर 1023 ई0 को दीपमालिका के दिन दिल्ली में स्वर्गीय आचार्य श्री रामदेव जी तथा आचार्या श्री विद्यापती जी सेट के संरक्षण में कन्या गुरूकुल को स्थापित किया। कन्या गुरूकुल तीन साल के लगभग दिल्ली में रहकर 1-5-1927 को देहरादून आ गया, और तब से ही यहीं पुष्पित-पल्लवित हो रहा है।


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