पता : कन्या गुरुकुल महाविद्यालय,
60, राजपुर रोड, देहरादून
टेलीफोन : +91-135-2748334
ईमेल : info@kgmdoon.com

नियम एवं निर्देश

कन्या गुरूकुल के संक्षिप्त नियम

प्रवेश:

  • प्रवेश के समय कंन्या की आयु 6 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए।
  • कन्या गुरूकुल में वे ही कल्याएं प्रविष्ट हो सकेंगी जिनका शारीरिक तथा मानसिक स्वास्यि ठीक हों।
  • कन्या के माता-पिता व संरक्षक को प्रवेश के समय यह प्रतिज्ञा करनी होगी कि वे न्यूनतम 18 वर्ष की आयु से पूर्व उस कन्या की सगाई व विवाह न करें।
  • जो महानुभााव अपनी कन्या को प्रविष्ट करना चाहें उन्हें कार्यालय से छपा हुआ प्रवेश फार्म मंगाकर, भरकर भेज देना चाहिए और स्वीकृति मिलने पर बताई हुई तिथि या तारीख पर कन्या को प्रवेशार्थ लेना चाहिए।
  • कन्या के प्रवेशार्थ गुरूकुल में आने पर कन्या गुरूकुल की आचार्या तथा डाॅक्टर उसकी परीक्षा लेकर तथा निरीक्षण करके उसे प्रविष्ट कराने की स्वीकृति देंगी।

ब्रह्नाचारिणियांें से मिलने, बाहर आने-जाने और पत्र-व्यवहार विषयक प्रतिबन्ध

  • विशेष अवस्थाओं के अतिरिक्त किसी ब्रह्नाचारिणी को गुरूकुल से बाहर अवकाश पर जाने की आज्ञा नहीं मिल सकेगी। अगर ब्रह्नाचारिणी स्वंय कठिन रोगग्रस्त हो या उसके संरक्षक या कोई निकट सम्बन्धी कठिन रोग ग्रस्त हो या मृत्यु हो जाय तो अवकाश मिल सकेगा। ब्रह्नाचारिणी के संरक्षक या सम्बन्धी की मृत्यु या कठिन रोगग्रस्त होने की अवस्था में अवकाश की आज्ञा 15 दिन से अधिक न होगी। यदि ब्रह्नाचारिणी स्वंय रोगग्रस्त हो या और कोई आवश्यक कार्य हो तो 6 माह से अधिक की छुूट्टी नहीं मिलेगी।
  • अवकाश के समय शुल्क बराबर लिया जायेगा और ब्रह्नाचारिणियों को अवकाश पर घर ले जाने व वापस भेजने का सारा मार्गव्यय ब्रह्नाचारिणी के संरक्षकों को देना होगा।
  • यदि ब्रह्नाचारिणी रोगग्रस्त होने पर अवकाश पर भेजी जावे और गुरूकुल का चिकित्सक समझे कि उनकी चिकित्सा गुूरूकुल में ठीक तौर पर होनी कठिन है, तो सभा की अनुज्ञा से एक मास से अधिक रूग्णावकाश के दिनों में शुल्क में न्यूनता की जा सकेगी।
  • अवकाश पर जाते हुए संरक्षक को एक फार्म भरना होगा कि अगर वह कन्या को ठीक समय पर नहीं पहुंचायेंगे तो वे 1- प्रतिदिन के हिसाब से विलम्ब दण्ड देंगे।
  • संरक्षक या संरक्षक द्वारा अधिकृत व्यक्ति के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति को शिक्षाणालय में किसी विद्यार्थिनी से मिलने की आज्ञा न होगी। विशेष अवस्था में आचार्या यथोचित आज्ञा दे सकती है। साधारणतया ऐसा मिलना मास में एक बार से अधिक न होगा।
  • ब्रह्नाचारिणियां अपने संरक्षकों से मास में एक बार से अधिक पत्र व्यवहार न कर सकेंगी। यह पत्र व्यवहार भी आचार्या के द्वारा ही हुआ करेगा।
  • छात्रा से मिलने आने वाले व्यक्तियों का सम्बन्धित छात्रा के अलावा किसी दूसरी छात्रा से मिलने का नियम नहीं हैं।
  • संरक्षकों को चाहिये के वे पढ़ाई के समय छात्राओं को मिलने तथा बाहर बाजार आदि के लिए न बुलायें।
  • यदि इस शिक्षणालय की कोई विद्यार्थिनी किसी ऐसे कुव्यवहार को दोषी हो जिसके कारण उसका शिक्षणालय की विद्यार्थिनियों के साथ रहना अनुचित समझा जाय तो वह शिक्षाणालय से निकाल दी जायेगी।

छात्राओं क दैनिक कार्यक्रम

उठने का समय 4 बजे प्रातःकाल (छोटी कन्याओं को 5 बजे)
संध्या हवन 6 बजे
स्वाध्याय 6 बजे से 8 बजे तक (1 शिक्षिका के निरीक्षण में)
नाश्ता 8 बजे
कक्षा में पठन 10 बजे से 1 बजे तक
भोजन 1 बजे से 2 बजे तक
कक्षा में पठन 2 बजे से 5 बजे तक
अनिवार्य खेल 5 बजे से 6 बजे तक
संध्या हवन 6 बजे
स्वाध्याय 6.30 बजे से 8.30 बजे तक
भोजन  8.30 बजे

नोट -  मौसम के अनुसार तथा विद्यालय एवं महाविद्यालय विभाग की छात्राओं के शिक्षा सम्बन्धी नियमानुसार उपरोक्त कार्यक्रम में परिवर्तन किया जाता है।


नवीनतम समाचार
नवीन सत्र प्रारम्भ 2018-19

प्रवेश परीक्षा प्रत्येक माह के प्रत्येक शनिवार को कराई जायेगी, प्रवेश परीक्षा की तिथि मई 19, 26, व 2, 9, 16, 23, 30 जून 2018